स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर

क्या इसके लिए सच में डॉक्टर को दिखाने की जरूरत है?”

महिलाएं अपनी सेहत को लेकर यह सवाल बहुत बार खुद से पूछती हैं।

पीरियड चार-पांच दिन देर से आया है। पेट के निचले हिस्से में दर्द कुछ समय से बना हुआ है। हर महीने रक्तस्राव पहले से ज्यादा हो रहा है। गर्भधारण की कोशिश कर रही हैं, लेकिन बात बन नहीं रही। या फिर कोई रिपोर्ट हाथ में है और उसमें लिखी बात समझ नहीं आ रही।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर से कब मिलना चाहिए? अपनी परेशानी को टालें नहीं

पहला ख्याल अक्सर यही आता है कि थोड़ा और इंतजार कर लेते हैं।

कभी यह इंतजार ठीक रहता है। लेकिन हर बार नहीं।

ऐसी स्थिति में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर से बात करना जरूरी हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि परेशानी गंभीर ही है। बस इतना है कि शरीर में बार-बार हो रहे बदलाव का कारण अंदाजे से तय करना ठीक नहीं।

डॉक्टर के पास जाने की वजह हमेशा दर्द नहीं होती

गाइनेकोलॉजिस्ट के पास जाने के लिए दर्द का बहुत ज्यादा होना जरूरी नहीं है।

कई महिलाएं तब डॉक्टर के पास जाती हैं जब परेशानी रोजमर्रा के काम में रुकावट डालने लगती है। लेकिन उससे पहले भी सलाह ली जा सकती है।

मसलन, पहले पीरियड हर महीने लगभग एक ही समय पर आते थे और अब कई महीनों से उनका कोई तय समय नहीं है। या हर महीने होने वाला दर्द धीरे-धीरे इतना बढ़ गया है कि छुट्टी लेनी पड़ती है।

कभी समस्या कुछ और होती है। शादी के बाद गर्भधारण को लेकर सवाल हो सकते हैं। किसी जांच में कुछ ऐसा लिखा मिल सकता है जिसे देखकर चिंता होने लगे। गर्भावस्था शुरू होने के बाद हर नई रिपोर्ट अपने साथ दस नए सवाल लेकर आ सकती है।

इनमें से किसी भी स्थिति में डॉक्टर से बातचीत की जा सकती है।

और एक अच्छी बात यह है कि हर बार डॉक्टर का जवाब दवा नहीं होता। कई बार वह यह भी बता सकती हैं कि चिंता की बात नहीं है, बस निगरानी रखनी है। या फिर यह कि अब जांच कराना बेहतर होगा।

पीरियड के बारे में जो आपको सामान्य लगता है, वह हमेशा सामान्य हो ऐसा जरूरी नहीं

महिलाएं अपने शरीर के बदलावों को सबसे पहले खुद ही नोटिस करती हैं।

आपको पता होता है कि आपका पीरियड आम तौर पर कब आता है। कितने दिन रहता है। कितना दर्द होता है। रक्तस्राव कितना रहता है।

इसलिए अगर उसमें लगातार बदलाव हो रहा है, तो उस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।

एक-दो बार चक्र आगे-पीछे हो जाना अपने आप में बड़ी समस्या नहीं माना जा सकता। लेकिन अगर कई महीनों से पीरियड अनियमित हैं, बहुत ज्यादा रक्तस्राव हो रहा है या दर्द पहले से काफी बढ़ गया है, तो डॉक्टर से बात करना ठीक रहेगा।

इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। हार्मोन में बदलाव, पीसीओएस, वजन में बदलाव, तनाव या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी मासिक चक्र को प्रभावित कर सकती हैं।

यही कारण है कि किसी दूसरे व्यक्ति की दवा अपने लिए लेना समझदारी नहीं है।

आपकी समस्या का कारण वही हो, यह जरूरी नहीं।

पीसीओएस के मामले में सबसे पहले खुद से फैसला करें

पीसीओएस का नाम अब बहुत सुनने को मिलता है।

किसी महिला के पीरियड अनियमित हैं तो वह सोचती है कि शायद पीसीओएस है। मुंहासे बढ़े तो भी यही ख्याल आता है। वजन बढ़ा तो भी।

लेकिन केवल इन लक्षणों से पीसीओएस की पुष्टि नहीं होती।

अगर आपको लगातार अनियमित पीरियड हो रहे हैं या हार्मोन से जुड़ी दूसरी शिकायतें हैं, तो पीसीओएस के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

अगर पहले से जांच हो चुकी है, तो पुरानी रिपोर्ट साथ लेकर जाएं। डॉक्टर आपकी परेशानी और रिपोर्ट को साथ देखकर आगे की जरूरत समझ सकती हैं।

पीसीओएस को लेकर एक और गलतफहमी है कि इसका असर हर महिला पर एक जैसा होता है।

ऐसा नहीं है।

किसी महिला की मुख्य परेशानी पीरियड हो सकती है। किसी के लिए गर्भधारण चिंता का विषय हो सकता है। किसी को दूसरे लक्षण परेशान कर सकते हैं।

इसलिए किसी दोस्त, रिश्तेदार या इंटरनेट पर मिली जानकारी को अपना इलाज मान लेना सही रास्ता नहीं है।

बच्चा प्लान कर रही हैं और काफी समय से इंतजार कर रही हैं?

यह सवाल थोड़ा निजी है, लेकिन जरूरी भी।

गर्भधारण में समय लगने पर बहुत-सी महिलाओं को सबसे पहले परिवार से सवाल सुनने पड़ते हैं। उसके बाद इंटरनेट पर खोज शुरू होती है। फिर हर कोई कोई न कोई कारण बताने लगता है।

इससे चिंता कम होने की बजाय बढ़ जाती है।

अगर लंबे समय से गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो किसी बांझपन के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर अपनी स्थिति समझना बेहतर है।

डॉक्टर आपकी मासिक चक्र की जानकारी, पहले हुए उपचार, मेडिकल हिस्ट्री और उपलब्ध जांचों के बारे में पूछ सकती हैं। इसके बाद यह तय किया जा सकता है कि आगे किस तरह की जांच की जरूरत है।

यह भी याद रखना चाहिए कि गर्भधारण में परेशानी केवल महिला से जुड़ी हो, ऐसा जरूरी नहीं। कुछ मामलों में पुरुष साथी की जांच भी जरूरी होती है।

इसलिए ऐसे मामले में किसी एक व्यक्ति को दोष देने से कोई फायदा नहीं होता।

पहले वजह पता करनी चाहिए।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर वाराणसी-डॉ. नीपू चौरसिया

गर्भावस्था के दौरान सवाल होना बिल्कुल सामान्य है

गर्भावस्था की शुरुआत में शायद सबसे ज्यादा सवाल होते हैं।

रिपोर्ट ठीक है या नहीं?

यह दर्द सामान्य है या नहीं?

दवा जारी रखनी है या नहीं?

अगली जांच कब होगी?

इन सवालों के जवाब पड़ोसी, रिश्तेदार या इंटरनेट से लेने की बजाय अपने डॉक्टर से पूछना बेहतर है।

गर्भावस्था के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ चुनते समय प्रसूति के अनुभव पर ध्यान देना चाहिए। खासकर तब, जब गर्भावस्था में किसी अतिरिक्त निगरानी की जरूरत हो।

डॉक्टर आपकी स्थिति देखकर तय करती हैं कि सामान्य निगरानी पर्याप्त है या अधिक सावधानी चाहिए।

गर्भावस्था में अगर बहुत ज्यादा रक्तस्राव, तेज दर्द, बेहोशी या कोई दूसरा गंभीर अचानक लक्षण हो, तो सामान्य ऑनलाइन सलाह का इंतजार नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

गर्भाशय की समस्या सुनकर घबराने से पहले रिपोर्ट समझिए

कई बार किसी जांच में गर्भाशय से जुड़ी कोई बात सामने आती है और महिला सीधे इंटरनेट पर उसका मतलब खोजने लगती है।

वहीं से डर शुरू होता है।

एक ही शब्द अलग-अलग परिस्थितियों में अलग अर्थ रख सकता है। इसलिए किसी रिपोर्ट की एक पंक्ति पढ़कर निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं।

अगर आपको गर्भाशय से जुड़ी समस्या बताई गई है, तो रिपोर्ट किसी योग्य महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं। वह आपकी उम्र, लक्षण, पिछली मेडिकल हिस्ट्री और जांच को साथ देखकर स्थिति समझ सकती हैं।

हर समस्या का इलाज भी एक जैसा नहीं होता।

कुछ मामलों में केवल निगरानी की जरूरत हो सकती है। कुछ में दवा दी जा सकती है। और कुछ स्थितियों में आगे किसी प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है।

पहले कारण पता होना चाहिए।

क्या ऑनलाइन डॉक्टर से बात करना पर्याप्त हो सकता है?

कई मामलों में हां।

अगर पहले डॉक्टर को दिखा चुकी हैं और अब रिपोर्ट समझनी है, दवा के बारे में कुछ पूछना है या इलाज के बाद की स्थिति बतानी है, तो ऑनलाइन बातचीत सुविधाजनक हो सकती है।

अगर आप पहली बार अपनी परेशानी के बारे में बात करना चाहती हैं, तब भी शुरुआती बातचीत ऑनलाइन हो सकती है।

लेकिन हर परेशानी स्क्रीन पर नहीं समझी जा सकती।

डॉक्टर को अगर शारीरिक जांच करनी है, अल्ट्रासाउंड या दूसरी जांच की जरूरत है, तो आपको अस्पताल बुलाया जा सकता है।

इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है।

ऑनलाइन बातचीत का उद्देश्य अस्पताल जाने से हर हाल में बचना नहीं है। इसका उद्देश्य जरूरत पड़ने पर डॉक्टर तक आसानी से पहुंच बनाना है।

अपने लिए डॉक्टर ढूंढते समय यह गलती करें

आजकल “स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नजदीक” लिखना बहुत आसान है।

कुछ ही सेकंड में कई नाम सामने आ जाते हैं।

लेकिन डॉक्टर चुनते समय केवल यह देखना कि कौन सबसे ऊपर दिखाई दे रहा है, पर्याप्त नहीं है।

अपनी परेशानी पहले समझें।

अगर आप गर्भावस्था की देखभाल चाहती हैं, तो प्रसूति का अनुभव देखना स्वाभाविक है। अगर गर्भधारण में दिक्कत है, तो बांझपन से जुड़ी विशेषज्ञता देखिए। पीरियड या पीसीओएस की समस्या है तो उसी क्षेत्र में अनुभव रखने वाले डॉक्टर की जानकारी लीजिए।

डॉक्टर की योग्यता भी देखिए।

और हां, बातचीत का तरीका भी मायने रखता है।

महिलाओं को कई बार ऐसी बातें बतानी पड़ती हैं जिन्हें वे किसी और के सामने कहने में असहज महसूस करती हैं। इसलिए ऐसा डॉक्टर होना जरूरी है जिसके सामने आप अपनी बात पूरी तरह रख सकें।

वाराणसी में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर चुनते समय

वाराणसी में रहने वाली महिलाओं के लिए डॉक्टर तक पहुंच भी एक व्यावहारिक बात है।

अगर इलाज एक बार की मुलाकात तक सीमित नहीं है, तो अस्पताल का स्थान और आगे की चिकित्सा सुविधा दोनों देखना उपयोगी रहता है।

खासकर गर्भावस्था और बांझपन के मामलों में आगे भी परामर्श और जांच की जरूरत पड़ सकती है।

इसलिए स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर वाराणसी की तलाश करते समय सिर्फ दूरी देखकर निर्णय न लें। डॉक्टर की योग्यता, अनुभव और आपकी जरूरत के बीच तालमेल देखना ज्यादा उपयोगी रहेगा।

डॉ. नीपू चौरसिया, गंगोश्री अस्पताल, वाराणसी

गंगोश्री अस्पताल, वाराणसी में डॉ. नीपू चौरसिया स्त्री रोग, प्रसूति और बांझपन विशेषज्ञ के रूप में परामर्श देती हैं।

उनकी योग्यता एमबीबीएस, एमएस (प्रसूति एवं स्त्री रोग) और डीजीओ है। उन्हें दस वर्ष से अधिक का अनुभव है।

उनके काम के क्षेत्रों में उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था और मातृ देखभाल, बांझपन, पीसीओएस और हार्मोन संबंधी समस्याएं, मासिक धर्म से जुड़ी परेशानियां तथा लेप्रोस्कोपिक स्त्री रोग संबंधी शल्य प्रक्रियाएं शामिल हैं।

किसी महिला के लिए डॉक्टर से मिलने की वजह कुछ भी हो सकती है।

किसी को अपने पीरियड को लेकर चिंता है। किसी को गर्भावस्था की जांच समझनी है। कोई गर्भधारण की योजना बना रही है। किसी को पहले से चल रही समस्या के बारे में आगे की सलाह चाहिए।

ऐसे मामलों में डॉक्टर सबसे पहले आपकी बात और मेडिकल हिस्ट्री समझती हैं। इसके बाद ही यह तय किया जाता है कि आगे जांच, इलाज या केवल निगरानी में से क्या उचित रहेगा।

यही वजह है कि डॉक्टर से बात करने का मतलब हमेशा किसी बीमारी की पुष्टि होना नहीं है।

कई बार इसका मतलब सिर्फ अपनी चिंता का सही जवाब पाना होता है।

डॉक्टर से मिलने से पहले क्याक्या याद रखें?

आपको मेडिकल किताब पढ़कर डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं है।

बस अपनी बात ठीक से बताने की कोशिश करें।

पीरियड की समस्या है तो हाल की तारीखें याद रखें। दर्द है तो बताएं कि कब होता है और कितना रहता है। कोई पुरानी जांच हुई है तो रिपोर्ट लेकर जाएं।

जो दवाएं ले रही हैं, उनके नाम लिख लें।

और जो बात सबसे ज्यादा परेशान कर रही है, उसे शुरुआत में ही बता दें।

डॉक्टर को आपकी परेशानी का अंदाजा लगाने के बजाय सीधे आपकी बात सुनने का मौका मिलेगा।

कुछ लक्षणों में इंतजार करें

हर समस्या के लिए तुरंत अस्पताल भागना जरूरी नहीं है।

लेकिन कुछ स्थितियां ऐसी हैं जिन्हें टालना भी ठीक नहीं।

बहुत अधिक रक्तस्राव, अचानक तेज पेट या श्रोणि में दर्द, बेहोशी, सांस लेने में गंभीर परेशानी या गर्भावस्था के दौरान अचानक गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

ऐसी स्थिति में ऑनलाइन जानकारी खोजते रहना सही कदम नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पीरियड अनियमित होने पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

अगर कभी-कभार थोड़ा बदलाव हुआ है तो हर बार चिंता की जरूरत नहीं होती। लेकिन समस्या लगातार बनी रहे, पीरियड कई महीनों तक अनियमित रहें, दर्द बढ़ जाए या रक्तस्राव बहुत अधिक हो, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

क्या हर अनियमित पीरियड का कारण पीसीओएस होता है?

नहीं। अनियमित पीरियड कई कारणों से हो सकते हैं। पीसीओएस उनमें से एक कारण हो सकता है, लेकिन केवल पीरियड की अनियमितता के आधार पर इसका निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

गर्भधारण में परेशानी हो तो किससे मिलना चाहिए?

स्त्री रोग और बांझपन विशेषज्ञ से सलाह ली जा सकती है। डॉक्टर आपकी स्थिति देखकर आगे की जांच की दिशा बता सकती हैं। कुछ मामलों में दोनों साथियों की जांच की आवश्यकता हो सकती है।

क्या गर्भावस्था में ऑनलाइन सलाह ली जा सकती है?

कुछ सामान्य सवालों और रिपोर्ट पर चर्चा ऑनलाइन की जा सकती है। लेकिन तेज दर्द, अधिक रक्तस्राव, बेहोशी या किसी गंभीर लक्षण की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना चाहिए।

क्या गर्भाशय की समस्या का मतलब ऑपरेशन होता है?

नहीं। इलाज समस्या के कारण और उसकी स्थिति पर निर्भर करता है। हर गर्भाशय संबंधी समस्या में शल्य चिकित्सा की जरूरत नहीं होती।

क्या डॉक्टर को पुरानी रिपोर्ट दिखानी चाहिए?

हां। पुरानी रिपोर्ट, पर्चियां और चल रही दवाओं की जानकारी डॉक्टर को आपकी पिछली स्थिति समझने में मदद कर सकती है।

अपनी परेशानी को सिर्फ इसलिए मत टालिए क्योंकि वह निजी है

महिलाओं की कई स्वास्थ्य समस्याएं ऐसी होती हैं जिनके बारे में वे घर में भी खुलकर बात नहीं करतीं।

लेकिन डॉक्टर के सामने शर्म या झिझक रखने की जरूरत नहीं है।

पीरियड में लगातार बदलाव हो, पीसीओएस को लेकर सवाल हो, गर्भधारण में परेशानी हो, गर्भावस्था को लेकर चिंता हो या गर्भाशय से जुड़ी कोई रिपोर्ट समझनी हो, तो योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ से बात करना पहला व्यावहारिक कदम हो सकता है।

वाराणसी में डॉ. नीपू चौरसिया, गंगोश्री अस्पताल में स्त्री रोग, प्रसूति और बांझपन से जुड़ी समस्याओं पर परामर्श देती हैं।

अपनी परेशानी को खुद समझने की कोशिश करते-करते महीनों निकालने से बेहतर है कि एक बार डॉक्टर से बात कर ली जाए।

कम से कम आपको यह तो पता चलेगा कि चिंता करने की जरूरत है या नहीं।